यह सब जान लो आज मातृत्व का सम्मान हूँ तदबीर बदल सकती हूँ। यह सब जान लो आज मातृत्व का सम्मान हूँ तदबीर बदल सकती हूँ।
बस मेरा नाम गाँव है। अब मैं गाँव नहीं हूँ। शहर का पिद्दी सा पिछलग्गू हूँ। बस मेरा नाम गाँव है। अब मैं गाँव नहीं हूँ। शहर का पिद्दी सा पिछलग्गू हूँ।
जिन्दगी में मुझे अब ऐसे शख्स कि तलाश नहीं। जिन्दगी में मुझे अब ऐसे शख्स कि तलाश नहीं।
अबला मत समझो सबला हूँ तिल तिल जलती देती प्रकाश। अबला मत समझो सबला हूँ तिल तिल जलती देती प्रकाश।
नारी की सुन्दर गरिमा हूँ, प्रकृति की रचनाओं से प्रेरित रचना हूँ, नारी की सुन्दर गरिमा हूँ, प्रकृति की रचनाओं से प्रेरित रचना हूँ,
मैं था तो नहीं आवाज़, फिर भी कहता सुनता रहा हूँ, कभी सन्नाटे की फुसफुसाहट, कभी शोर म मैं था तो नहीं आवाज़, फिर भी कहता सुनता रहा हूँ, कभी सन्नाटे की फुसफुसाहट, ...